जिन सज्जनों की आयु ५० वर्ष से ७० वर्ष के मध्य है वह जानते होंगे कि प्रकृति ने काशीपुर एवं उसके आस पास उपहार स्वरुप कई नदियाँ, नहरें, झीलें, ताल, तालाब, कुएं आदि दिए थे यह भी ध्यान होगा की शहर के बीचों बीच बहने वाला गन्दा नाला किसी समय साफ़ सुथरे जल की नहर थी जिसका जल पीने के कार्य एवं घर के कार्यों में प्रयुक्त किया जाता था, परन्तु आज तालाबों, झीलों को पाट दिए जाने से कुएं सूख गएँ हैं, कटोराताल भी पाट दिया गया जिस कारण से भूमि जल स्तर काफी गिर गया है नदियों के जल को फक्ट्रियों के गंदे पानी ने प्रदूषित कर दिया है, शहर में अब दो बड़े ताल रह गएँ हैं १) द्रोणासागर २) गिरीताल जो कि वर्तमान में एतिहासिक एवं पर्यावरण दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण हैं !
द्रोणासागर को तीर्थ का दर्जा प्राप्त है परन्तु कई कारणों से वह उपेक्षित है जिसमे कभी प्रकृति से प्राप्त लबालब जल भरा रहता था, कछुए, पातळ और अन्य जल जीव इसकी शोभा बढाते थे, परन्तु अब यह जनता, प्रशासन, शासन की घोर उपेक्षा से जल का स्रोत न रहकर कुछ भी नहीं रह गया है !