For Advertisements call +91-9536862427

Raghwendra Nagar's blog

Raghwendra Nagar's picture

आखें है या बटन

काशीपुर के मध्य में बहने वाली लक्ष्मी  पुर पट्टी माइनर सेकडों वर्षों से बह रही है जिस पर गत ४० वर्षों से अवेध्य कब्जे किये जा  चुके हैं ,कई बार लाखों रूपये लगाकर इसकी सफाई भी कराई जा चुकी है ,आज की तारीख में भी कब्जे बदस्तूर चल रहे हैं जिसमे नगरपालिका ,नगर निवासियों  ,दुकानदारों आदि हैं |कई बार इसकी जाँच -निरीक्षण -तोड़-फोड़ हो चुकी सब जैसा का तैसा है ,काशीपुर मै बरसाती पानी भरने का मुख्य कारण यही है जबकी नहर के दोनों ओर पक्की दीवार बने ,कूड़ा डालना गंदगी डालना संज्ञेय अपराध मानकर भारी जुरमाना -जेल की सजा की जाय |
                       कल सचिव सिचांई ने निरीक्षण किया खुशी की बात है , निर्णय क्या होता है यह अलग बात है |इसी नहर का दूसरा भाग गिरीताल के आगे से कट कर द्रोणासागर  के बराबर से होता हुआ सेठी पेट्रोल पम्प से चीनी मिल के पास निकलता है जिसपर सेठी पम्प से सुभाष नगर से भी आगे तक नगर वासिओं ने नहर को अवैधानिक रूप से पाट कर रास्ता कार  पार्किंग बना लिए है  क्या सिचाई विभाग के पतरोल-इंजीनियर को यह लगातार जारी कार्यवाही नजर नही आ रही जो कई ५०  वर्ष बाद एक ओर समस्या बनने जा रही है|आखें है या बटन ?????

Raghwendra Nagar's picture

डालर-रूपये का असंतुलन देश के लिए हानिकारक

देशवासिओं मात्र एक ईस्टइंडिया कम्पनी ने देश को गुलाम बना दिया ,अब १३०० से भी अधिक विदेशी कम्पनियां है क्या हाल होगा ? एक डालर =६० रूपये कहाँ पहुँचगये हम ?सीधा अर्थ है हम आर्थिक गुलामी की ओर बढ़ रहें है | इससे मुक्ति का उपाय स्वदेशी अपनाओ है जो कोई नहीं मन रहा ,मात्र कोका कोला-पेप्सी छोड देने मात्र से एक दिन में करोंड़ों डालर बच जायेंगे |

पहले स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी ऐसा ही कार्यक्रम चलाते थे ,उनका अनुसरण जनसंघ हिंदू महासभा , भा.ज.पा. ने किया अब सब भूल गये |आईये फिर से स्वदेशी अपनाने का नारा दें उठना -बैठना -नहाना -धोना -चलना -फिरना -खाना -पीना -रहना -सोना मै स्वदेशी वस्तुओं का प्रयोग करें |

युवाओं पर इसका सीधा असर होना देश हित मै होगा तब देखिए डालर कितना नीचे आ जाता है |

Raghwendra Nagar's picture

अपने पुत्र-पौत्र-प्रपोत्रों के हित में ...

जिन सज्जनों की आयु ५० वर्ष से ७० वर्ष के मध्य है वह जानते होंगे कि प्रकृति ने  काशीपुर एवं उसके आस पास उपहार स्वरुप कई नदियाँ, नहरें, झीलें, ताल, तालाब,  कुएं आदि दिए थे यह भी ध्यान होगा की शहर के बीचों बीच बहने वाला गन्दा नाला  किसी समय साफ़ सुथरे जल की नहर थी जिसका जल पीने के कार्य एवं घर के कार्यों  में प्रयुक्त किया जाता था, परन्तु आज तालाबों, झीलों को पाट दिए जाने से कुएं सूख गएँ हैं, कटोराताल भी पाट दिया गया जिस कारण से भूमि जल स्तर काफी गिर गया है नदियों के जल को फक्ट्रियों के गंदे पानी ने प्रदूषित कर दिया है, शहर में अब दो बड़े ताल रह गएँ हैं १) द्रोणासागर २) गिरीताल जो कि वर्तमान में एतिहासिक एवं पर्यावरण  दृष्टिकोण से अति महत्वपूर्ण हैं !

द्रोणासागर को तीर्थ का दर्जा प्राप्त है परन्तु कई कारणों से वह उपेक्षित है जिसमे कभी प्रकृति से प्राप्त लबालब जल  भरा रहता था, कछुए, पातळ और अन्य जल जीव इसकी शोभा बढाते थे, परन्तु अब यह जनता, प्रशासन, शासन की घोर उपेक्षा से जल का स्रोत न रहकर कुछ भी नहीं रह गया है !

Subscribe to RSS - Raghwendra Nagar's blog