अजब देखा काशीपुर शहर सारे जगत मे ।।

कवि गुमानी पन्त जी द्वारा काशीपुर के बारे में लिखी कविता

कथावाले सस्ते फिरत धर पोथी बगल मे ।
लई थैली गोली घर-घर हकीमी सब करें ।।
रंगीला-सा पत्रा कर धरत जोशी सब बने ।
अजब देखा काशीपुर शहर सारे जगत मे ।।१।।

जहाँ पूरी गरमा-गरम, तरकारी चटपटी ।
दही बूरा डन भर-भार भले ब्राह्मण छकें ।।
छहे न्यैतेवारे सुनकर अठरे बाद गये ।
अजब देखा काशीपुर शहर सारे जगत मे ।।२।।

जहाँ ढेला नदी ढिग रहट मेला दिन छिपे ।
जहाँ पट्टी पातुर झलकट पारी-सी महल मे ।।
तले ठोकर खाते फिरत सब गलिन मे ।
अजब देखा काशीपुर शहर सारे जगत मे ।।३।।

कदी जसपुर पट्टी फिरकर कदी तो चिलकिया ।
कदी घर मे सोते भर नयन भोरे उठ चले ।।
सभी तात्त लादे बनज रूज़गरी सब बने ।
अजब देखा काशीपुर शहर सारे जगत मे ।। ४ ।।

यहाँ ढेला नद्दी उत बहत गंगा निकट में ।
यहाँ भोला मोटेश्वर रहत विश्वेश्वर वहाँ ।।
यहाँ सण्डे दण्डे कर धर फिरें शाँडउत ही ।
फरक क्या है काशीपुर शहर काशी नगर में ।। ५ ।।

References: 
Page 55-56 Kumaun Ka Itihas by BD Pande (written in 1937) Publisher Vinod Prasad Agarwal,Shyam Prakashan, Sri Almora Book Depot Almora. Edition 1990 Printed By D.K.Fine Art Press Delhi.

Creative Commons License
Donate towards our web hosting bill!
Spread Firefox Affiliate Button